किसान खेती के कामों में मग्न हुए
गोंदिया । कोरोना के इस महामारी से जहां एक ओर हाहाकार है वहीं दूसरी ओर किसान अपनी खेती कार्य में जुटे हुए नजर आए रहे हैं। सभी गांव में खेती के कार्य में जुटे किसान अपने अपने तौर तरीके से एवं पारंपरिक, अत्याधुनिक खेती कर रहे हैं। वर्षा को इस साल ज्यादा महत्व होने के कारण अच्छी बुवाई के समय यह वर्ष और यहां काल उपयुक्त माना गया है। जिस और कोरोना काल में जनता महंगाई की मार झेल रहे हैं उसी प्रकार किसानों में भी बीजो एवं खादो से लेकर के महंगाई की मार झेल रहे हैं, महंगाई की मार को कम करने के लिए किसान अपने दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने के लिए तथा अनाज उगाने के लिए प्रतिकूल प्रतिपल सदियों से किसान करते आ रहे हैं। भारत की रीड की हड्डी कहने वाला किसान आज अपनी और देश का पेट पालने में लगे हुए हैं। अभी तक 10% खेती की बुआई का कार्य पूर्ण रूप से हो चुका है और आगामी 90% खेती के कार्य चालू है, तथा आगामी 10 दिनों के भीतर सभी बीजों की बुवाई होने का अनुमान है।
एक और जहां किसान सरकार से गुहार लगा रही है कि खरीफ फसलों में ज्यादातर बरसात नहीं होने के कारण उन्हें नुकसानी झेलना पड़ता है। इसलिए सरकार को किसानों ने मदद की गुहार लगाई है, इस साल अच्छी बरसात के साथ में अच्छी फसल का भी अनुमान लगाया जा रहा है। साथ ही साथ किसानों की फसलों का अच्छा दाम और मुआवजा दिया जाए इस हेतु किसानों ने गुहार लगाते हुए अपनी फसल और उर्वरक शक्ति के साथ करने का तब जोड़ मेहनत की हुई है।













No comments: